हनुमान और भीम की कथा: अहंकार का दर्पण । Hanumaan aur Bhim Ki Kahani: Ahamkaar ka Darpan
हनुमान और भीम की प्रेरणादायक कहानी महाभारत की अद्भुत कथा जिसमें हनुमान जी ने भीम का अहंकार दूर कर उन्हें विनम्रता का महत्व समझाया। परिचय (Introduction) महाभारत में वीरता, साहस और शक्ति की अनेक कहानियां मिलती हैं। पांडवों में भीम अपने अपार बल और गदा युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध थे। किंतु शक्ति के साथ अहंकार जुड़ जाए तो वह विनाश की ओर ले जाता है। यही शिक्षा देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने हनुमान जी के साथ उनका मिलन कराया। भीम का बल और उनका अहंकार भीम पांडवों में सबसे बलशाली माने जाते थे। उनका शरीर पर्वत की तरह विशाल और मजबूत था। वे अपनी शक्ति पर इतना भरोसा करते थे कि धीरे-धीरे यह आत्मविश्वास अहंकार में बदल गया। भगवान कृष्ण ने सोचा कि बिना विनम्रता के शक्ति निरर्थक है, इसलिए हनुमान जी ने उन्हें सबक सिखाने का निश्चय किया। द्रौपदी और सुंदर पुष्प वनवासकाल में द्रौपदी ने एक अद्भुत सुगंध वाला पुष्प देखा और भीम से उसे लाने को कहा। भीम उस पुष्प की खोज में निकल पड़े और यहीं उनकी मुलाकात हनुमान जी से हुई। ...