Skip to main content

Dhanteras 2025: झाड़ू खरीदने का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि | Dhanteras 2025 Muhurat & Jhadu Significance

धनतेरस 2025: झाड़ू खरीदने का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

धनतेरस पर झाड़ू, सोना-चाँदी व अन्य वस्तुएँ खरीदने की परंपरा और उसके लाभ विस्तार से जानिए।

धनतेरस 2025 कब है? | Dhanteras 2025 Date & Muhurat

तारीख (Date): शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025

पर्व (Festival): धनतेरस (Dhantrayodashi)

प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 05:52 PM से 07:47 PM तक

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 PM से 12:50 PM तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 16 अक्टूबर 2025, रात 11:10 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2025, रात 09:19 बजे

प्रदोष काल में दीपदान और लक्ष्मी-कुबेर पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

धनतेरस का महत्व | Importance of Dhanteras

धनतेरस का दिन कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन धन, स्वास्थ्य, समृद्धि और आयु वृद्धि का आशीर्वाद मां लक्ष्मी व भगवान धन्वंतरि से प्राप्त करने की परंपरा है। इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।

  • स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए इस दिन का विशेष महत्व है।
  • सोना-चाँदी व अनाज खरीदना घर में समृद्धि लाता है।
  • झाड़ू खरीदना भी दरिद्रता दूर करने का प्रतीक है।

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का महत्व | Significance of Buying Jhadu

भारतीय परंपराओं में झाड़ू को मां लक्ष्मी का वाहक माना गया है। जिस घर की झाड़ू साफ-सुथरी और सही दिशा में रखी हो, वहाँ लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

  • झाड़ू से घर की अशुद्धियाँ और दरिद्रता बाहर जाती हैं।
  • यह सकारात्मक ऊर्जा और सम्पन्नता का प्रतीक है।
  • धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से घर में मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है।

कितने झाड़ू खरीदें? | How Many Jhadu Should You Buy?

परंपरागत रूप से तीन झाड़ू खरीदने की मान्यता है:

  • एक घर के लिए → जिससे धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • एक मंदिर के लिए → पूजा स्थल की पवित्रता बनी रहती है।
  • एक किसी गरीब को देने के लिए → दान से पुण्य प्राप्त होता है।

यदि संभव न हो तो केवल एक झाड़ू भी पर्याप्त है। महत्व श्रद्धा और भावना का है, संख्या का नहीं।

झाड़ू खरीदने के नियम और सावधानियाँ | Rules & Precautions

  1. झाड़ू हमेशा नई और साफ होनी चाहिए।
  2. घर में लाते समय इसे ढककर लाएँ।
  3. झाड़ू को सीधा खड़ा करके न रखें।
  4. शुक्रवार या अमावस्या को झाड़ू खरीदना वर्जित है।
  5. रात के समय झाड़ू का उपयोग न करें।

झाड़ू खरीदने के लाभ | Benefits of Buying Jhadu

  • घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
  • व्यापार और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
  • घर का वातावरण सुख-शांति से भर जाता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता दूर होती है।

इसी कारण इसे "दरिद्रता नाशिनी" भी कहा जाता है।

धनतेरस पूजा विधि | Dhanteras Puja Vidhi

पूजा विधि (Hindi Steps):

  1. शाम में शुभ मुहूर्त पर पूजा स्थल की सफाई करें।
  2. गंगाजल छिड़ककर स्थान पवित्र करें।
  3. भगवान धन्वंतरि, कुबेर और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  4. 13 दीपक जलाकर घर के विभिन्न स्थानों पर रखें।
  5. नई झाड़ू पर हल्दी-कुमकुम लगाकर कोने में रखें।
  6. "यम दीपक" जलाकर मुख्य द्वार पर रखें।
  7. परिवार की समृद्धि और स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

How to Do Puja (English Steps):

  • Clean the puja area with Gangajal.
  • Place idols of Lord Dhanvantari, Kuber, and Goddess Lakshmi.
  • Light 13 diyas around the house.
  • Keep the new Jhadu in the corner and apply turmeric & kumkum.
  • Place Yam Deepak at the entrance.
  • Pray for wealth, health, and peace.

धनतेरस पर क्या खरीदें? | What to Buy on Dhanteras

  • सोना और चाँदी
  • बर्तन (चाँदी, तांबा, पीतल, स्टील)
  • झाड़ू
  • दीये और घर सजावट के सामान
  • धान/धान्य और अनाज
  • सिक्के और बच्चों के खिलौने

विशेष रूप से झाड़ू और अनाज खरीदना गृहलक्ष्मी के आगमन का प्रतीक है।

FAQs on Dhanteras 2025

प्रश्नउत्तर
धनतेरस 2025 कब है?धनतेरस 2025 शुक्रवार, 17 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
झाड़ू क्यों खरीदी जाती है?झाड़ू को दरिद्रता दूर करने वाली और लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।
क्या झाड़ू दान की जा सकती है?हाँ, इसे दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
धनतेरस पर पूजा किस देवता की होती है?मां लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है।
इस दिन क्या खरीदना शुभ होता है?झाड़ू, सोना-चाँदी, बर्तन, अनाज और दीपक खरीदना शुभ माना जाता है।

Comments

Popular posts from this blog

kanyakubj brahmin vanshavali : कान्यकुब्ज ब्राह्मण वंशावली

kanyakubj brahmin vanshavali : कान्यकुब्ज ब्राह्मण वंशावली नमस्कार मित्रों ,आज मुझे कान्यकुब्ज  ब्राह्मण की वंशावली प्राप्त हुई है अतः मैंने सोचा कि यह वंशावली आप सभी लोगों को उपलब्ध कराऊ प्राचीन काल में कन्नौज को कान्यकुब्ज देश कहा जाता था  इसीलिए जो ब्राह्मण कान्यकुब्ज देश से संबंध रखते थे वह सभी ब्राह्मण कान्यकुब्ज ब्राह्मण कहलाए कान्यकुब्ज ब्राह्मण वेदों और शास्त्रों में बहुत निपुण होते थे  इसलिए ऐसा माना जाता है कि कान्यकुब्ज ब्राह्मण ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण होते हैं  गोत्र और इष्ट देव कात्यायन गोत्र वंशावली कश्यप गोत्र वंशावली शांडिल्य गोत्र वंशावली उपमन्यु गोत्र वंशावली सांकृत गोत्र वंशावली भरद्वाज गोत्र वंशावली गर्ग गोत्र वंशावली गौतम गोत्र वंशावली धनंजय गोत्र वंशावली भारद्वाज गोत्र वंशावली वत्स गोत्र वंशावली कश्यप गोत्र वंशावली कौशिक गोत्र वंशावली वशिष्ठ गोत्र वंशावली पाराशर गोत्र वंशावली कविस्त गोत्र वंशावली

करवा चौथ 2025: व्रत विधि, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री और कथा | Karwa Chauth Vrat Vidhi

करवा चौथ 2025 व्रत विधि, कथा और शुभ मुहूर्त तिथि: गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025 करवा चौथ का महत्व (Karwa Chauth Vrat ka Mahatva) करवा चौथ भारतीय विवाहित स्त्रियों का एक पावन व्रत है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। यह व्रत केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि प्रेम, विश्वास और त्याग का भी प्रतीक है। करवा चौथ 2025 शुभ मुहूर्त विवरण समय / तिथि तिथि गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025 चतुर्थी तिथि प्रारंभ 9 अक्टूबर 2025, रात 10:54 PM चतुर्थी तिथि समाप्त 10 अक्टूबर 2025, शाम 10:38 PM पूजन का समय शाम 05:57 PM – 10:11 PM चंद्रोदय समय रात 08:47 PM करवा चौथ पूजन सामग्री (Karwa Chauth Puja...

धनतेरस की कहानी और महत्व |Dhanteras Ki Kahani Aur Mahatva

धनतेरस की कहानी | Dhanteras Ki Kahani, Puja Vidhi, Mahatva & Festival Story परिचय (Introduction) भारत एक उत्सवों की भूमि है, जहाँ हर त्योहार के साथ गहरी पौराणिक और सांस्कृतिक कहानियाँ जुड़ी होती हैं। दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाने वाला धनतेरस ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है। इसे "धनत्रयोदशी" भी कहा जाता है क्योंकि यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। धनतेरस के दिन धन, वैभव, सौभाग्य और आरोग्य की कामना की जाती है। इस दिन माँ लक्ष्मी, भगवान कुबेर और आरोग्य के देवता धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। साथ ही राजा हेम की कथा और उनकी पुत्रवधू का प्रसंग इस दिन की मान्यता को और भी गहरा बनाता है। धनतेरस का महत्व (Mahatva of Dhanteras) इस दिन धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है। व्यापारी और गृहस्थजन नया सोना-चाँदी, बर्तन या कीमती वस्तुएँ खरीदते हैं। खरीदी गई धातु को घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दीपदान और यमराज के नाम का दीपक जलाना आयु वृद्धि और सुरक्षा का संकेत है। धनतेरस की पौराणिक कहानियाँ (Dhanteras Ki Kahani) 1. धन्वं...