धनतेरस की कहानी | Dhanteras Ki Kahani, Puja Vidhi, Mahatva & Festival Story
परिचय (Introduction)
भारत एक उत्सवों की भूमि है, जहाँ हर त्योहार के साथ गहरी पौराणिक और सांस्कृतिक कहानियाँ जुड़ी होती हैं। दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाने वाला धनतेरस ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है। इसे "धनत्रयोदशी" भी कहा जाता है क्योंकि यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है।
धनतेरस के दिन धन, वैभव, सौभाग्य और आरोग्य की कामना की जाती है। इस दिन माँ लक्ष्मी, भगवान कुबेर और आरोग्य के देवता धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। साथ ही राजा हेम की कथा और उनकी पुत्रवधू का प्रसंग इस दिन की मान्यता को और भी गहरा बनाता है।
धनतेरस का महत्व (Mahatva of Dhanteras)
- इस दिन धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।
- व्यापारी और गृहस्थजन नया सोना-चाँदी, बर्तन या कीमती वस्तुएँ खरीदते हैं।
- खरीदी गई धातु को घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- दीपदान और यमराज के नाम का दीपक जलाना आयु वृद्धि और सुरक्षा का संकेत है।
धनतेरस की पौराणिक कहानियाँ (Dhanteras Ki Kahani)
1. धन्वंतरि और समुद्र मंथन
हिंदू शास्त्रों के अनुसार धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन से है। जब देवताओं व असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र का मंथन किया, तब चौदह रत्न निकले। इन्हीं रत्नों में से एक थे भगवान धन्वंतरि, जो अमृत कलश और औषधियाँ लेकर प्रकट हुए। इसलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती कहा जाता है।
2. राजा हेम और दीपदान की कथा
बहुत समय पहले राजा हेम नामक एक सम्राट था। ज्योतिषियों ने बताया कि उसकी पुत्रवधु के विवाह के चौथे दिन उसके पति की मृत्यु साँप के डसने से होगी।
उस कन्या ने उपाय किया — घर के बाहर सोना-चाँदी के गहनों और दीपों का ढेर लगाया और अपने पति को भीतर ही रखा। जब यमराज साँप के रूप में पहुँचे, तो गहनों और दीपों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं और वे लौट गए।
यमराज ने कहा, “इस कन्या की बुद्धिमानी के कारण उसके पति की आयु बढ़ गई है। भविष्य में यह दिन मनुष्य की मृत्यु से रक्षा का प्रतीक बनेगा।” तभी से दीपदान की परंपरा आरंभ हुई।
3. लक्ष्मी और कुबेर पूजन की कथा
कहा जाता है कि धनतेरस की रात लक्ष्मी और कुबेर पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। जो घर स्वच्छ व दीपों से आलोकित होता है, वहाँ वे प्रसन्न होकर प्रवेश करते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें (Do’s & Don’ts)
- धातु जैसे सोना, चाँदी, पीतल, स्टील खरीदना शुभ है।
- टूटी या पुरानी वस्तुएँ न खरीदें।
- शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाना चाहिए।
- झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है।
- काले अथवा अपशकुनी वस्त्र न पहनें।
धनतेरस पूजा विधि (Dhanteras Puja Vidhi)
- घर की पूरी सफाई करें और द्वार पर रंगोली व स्वस्तिक बनाएं।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा करें।
- जल, अक्षत, फूल, मिठाई और दीप अर्पित करें।
- पीतल या चाँदी के बर्तन में जल और पंचामृत रखें।
- कुबेर पूजन कर कुबेर मंत्र का जप करें।
- दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीप जलाएं।
धनतेरस और दीपावली का संबंध
- त्रयोदशी – धनतेरस
- चतुर्दशी – नरक चौदस
- अमावस्या – दीपावली
- प्रतिपदा – गोवर्धन पूजा
- द्वितीया – भाई दूज
शिक्षा (Moral)
- बुद्धिमानी और आस्था से कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है।
- श्रद्धा और दीपक की रोशनी से मृत्यु के भय को भी हराया जा सकता है।
- सच्चा धन स्वास्थ्य, विवेक और सकारात्मक सोच है।
निष्कर्ष (Conclusion)
धनतेरस केवल सोना या बर्तन खरीदने का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, धन, आयु और परिवारिक सुख का प्रतीक है। असली धन हमारे कर्म, प्रेम और आस्था में है।
इस धनतेरस पर दीपदान करें, दान करें और अपने घर एवं हृदय दोनों को प्रकाशित करें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: धनतेरस 2025 कब है?
उत्तर: 19 अक्टूबर 2025, रविवार को।
प्रश्न 2: धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?
उत्तर: सोना-चाँदी, नए बर्तन, झाड़ू और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ।
प्रश्न 3: क्या धनतेरस पर काले कपड़े पहन सकते हैं?
उत्तर: नहीं, उज्ज्वल और नए वस्त्र पहनना शुभ है।
प्रश्न 4: धन्वंतरि भगवान कौन हैं?
उत्तर: वे देवताओं के वैद्य और आरोग्य विज्ञान के जनक माने जाते हैं।
प्रश्न 5: धनतेरस पर दीपदान क्यों किया जाता है?
उत्तर: यमराज को दीप अर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

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