बाबा बिहारी और उनका यार
Bhakti Ki Kahani | Krishna Bhakti Story
Introduction
भारत की धरती पर समय-समय पर ऐसे संत, फकीर और बाबा जन्में हैं जिन्होंने अपने जीवन को सिर्फ भगवान और भक्ति के लिए समर्पित किया। ऐसी ही कहानी है रतन सिंह गांव के बाबा बिहारी की, जिन्हें लोग पागल मानते थे लेकिन उनका हृदय केवल श्रीकृष्ण में रमा था।
यह कथा न केवल उनकी भक्ति की है बल्कि इस बात का प्रमाण भी है कि जब मनुष्य पूरी तरह अपने ईश्वर को समर्पित हो जाता है, तो प्रभु उसका साथ कभी नहीं छोड़ते।
बाबा बिहारी की भक्ति का सफर
रतन सिंह गांव में लोग बाबा बिहारी को साधारण इंसान की तरह नहीं देखते थे। वे उन्हें अक्सर पागल समझते थे, क्योंकि वह दुनियादारी के नियमों में नहीं बंधते थे।
- कोई उन्हें गाली देता
- कोई पत्थर मारता
- कोई मजाक उड़ाता
भूख की कसौटी और यार का साथ
एक बार बाबा बिहारी दो-तीन दिन से भूखे थे। उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था। गांव के पास बने एक होटल के सामने खड़े होकर वे लोगों को खाते देखते रहे। तब एक सज्जन आए और बोले “बाबा, क्या आपको भूख लगी है?”
बाबा मुस्कुराए—“हाँ लगी तो है, पर अगर मेरा यार खिलाएगा तो खा लूँगा, नहीं खिलाएगा तो नहीं खाऊँगा।”
वह सज्जन उन्हें भोजन करवाते हैं, और बाबा उसे अपने यार की कृपा मानते हुए फिर गाते हैं—
पानी का गड्ढा और बाबा की परीक्षा
होटल से निकलने के बाद रास्ते में एक गड्ढा था जिसमें पानी भरा था। बाबा बिहारी उसमें कूद पड़े और मस्ती में उछलने लगे। पास से गुजरते कुछ नौजवानों के कपड़े भीग गए और वे क्रोधित होकर बाबा को पीटने लगे।
यार की लीला और न्याय का पलड़ा
पिटने के बाद भी बाबा ने सिर्फ यही कहा—“पहले दिया खाना, अब दिया बजाना। जैसे तुम रखोगे वैसे ही रहूंगा।”
कुछ देर बाद वही नौजवान एक ट्रक की चपेट में आ गए। जो लोग बाबा को पागल कह रहे थे, वे अस्पताल पहुंच गए। बाबा शांत मन से कृष्ण का नाम जपते रहे।
वृद्ध और बाबा के बीच संवाद
एक वृद्ध ने यह सब देखा और पूछा—“बाबा, आपने श्राप क्यों दिया?”
बाबा हँसे—“मैं क्यों किसी को श्राप दूँगा? मेरा यार सबका है। जिस पर अन्याय हुआ, उसका न्याय स्वयं मेरा यार करता है।”
कहानी का महत्व
यह कथा यह सिखाती है कि जब कोई भक्त हृदय से भगवान को समर्पित होता है, तो ईश्वर हमेशा उसका रक्षक बनता है। दूसरों का अपमान करने वाला अंततः अपने कर्मों का फल पाता है।
FAQs
Q1: बाबा बिहारी किस गांव के थे?
रतन सिंह गांव के रहने वाले थे।
Q2: वे किस भगवान के भक्त थे?
श्रीकृष्ण को ‘यार’ मानकर उनकी भक्ति करते थे।
Q3: लोग उन्हें पागल क्यों मानते थे?
क्योंकि वे दुनियादारी से अलग रहते और हर परिस्थिति में सिर्फ ‘यार’ का नाम लेते।
Q4: कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
सच्चा भक्त कभी अकेला नहीं होता, भगवान सदैव उसके साथ रहते हैं।
Q5: सबसे बड़ा सबक क्या है?
निर्दोष व्यक्ति का अपमान अंततः विपत्ति का कारण बनता है।
Conclusion
बाबा बिहारी की यह कथा केवल चमत्कार नहीं बल्कि आत्मविश्वास और श्रद्धा की मिसाल है। जब मनुष्य ईश्वर को ‘यार’ मानकर भक्ति करता है, तो जीवन की हर परिस्थिति में वह अडिग बना रहता है।

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